Wednesday, May 20, 2020

Great Work Of Sant Rampal Ji

Sant Rampal Ji is from Districts-Hisar, State-Haryana (India) and normal family of farmer. He was a common person before meet to Kabir Saheb. When the Kabir Saheb meet with him they getup the Gyan Yog of Saint Rampal ji and by the order of his Guru ji (Swami RamDevanand) gave the “NaamDiksha” to other. Now in these day Saint Rampal ji is the great Sait in the whole world.
Sant Rampal ji and his follower’s work are very great.
         The Complete Saint is Saint Rampal Ji Maharaj.
   

Sant Rampal ji and his Followers did the most valuable work for the India and they all gave the respect to the Government and all of their rules. 
Like👉 Make India clean 
       👉Dowry free marriages (Rameni)
       👉Make a nonviolent India. 
       👉Help each other. You have seen the days of lockdown his followers helped the Migrant labor and                                 provides ration to poor people of the whole country (India)
        👉Make the Drug free India by Spiritual knowledge of real god and told the meaning of Human life. 
        👉 Make the well educated India. 
        👉Distory the crime and criminals by the Satsang of reality. 
        👉Teach the lessons of humanity in Satsang. 
  
So now you can watch the satsang of Sant Rampal ji. And known the full knowledge about Sant Rampal Ji Maharaj. 
👇👇👇👇
Sure listen every day 
1️⃣ "Shraddha Mh1️⃣" channel from 02:00 P.M. 
2️⃣ "Ishwar" channel night 08:30 P.M. 
3️⃣ "Sadhana" Channel Evening 07:30 P.M.

Labels:

Thursday, May 14, 2020

भारत का पुनरूत्थान

प्रश्न:- पुनरूत्थान क्या है?
उत्तर:- पुनरूत्थान का मतलब है किसी का भी दुबारा जन्म या पुन: निर्माण होना।
       
   भारत का पुरूतथान:- कई बार अलग-अलग तरीक़ों से, अलग-अलग रूप से व अलग-अलग क्षेत्रो में हुआ है।
     जैसे ब्रिटेन सरकार द्वारा भारत को लूटा गया तो भारत के स्वतंत्रता-सैनानियों ने अपनी जान देकर भारत का पुन: हुआ जब भारत का शारीरिक,मानसिक व आर्थिक रूप से पुनरूत्थान हुआ और विकसित हुआ। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी हुआ जिसमें उस समय के योद्धाओं ने अपनी पूरी भूमिका निभाई।
     
           इस सब के परे भारत आज लगभग शिक्षित तो हो गया परंतु किसी ने यह नहीं सोचा की हक़ीक़त में इस शिक्षा की ज़रूरत क्यों पड़ी है ?
            आराम से तो लोग जब भी रहा करते थे तब राजाओं-महरजाओ का शासन चला करता था।जनता तो जब भी ख़ुश थी।परंतु लगभग 70-75 साल में ही शिक्षा पर ज़्यादा ज़ोर क्यों दिया जा रहा है और साथ ही इतने सारे आविष्कार (जैसे:- टेलिविज़न,मोबाइल,फ़ोन,इंटर्नेट,कम्प्यूटर....आदि-आदि) इस 21वीं सदी में ही क्यों हुए ? क्यों इस समय का पूर्ण परमात्मा का इस पृथ्वी पर आने का योग था और अपने ज्ञान का तेज़ी से प्रचार करने का भी योग था।
      जिससे पूर्ण परमात्मा अपने एक स्थान से अपने ज्ञान का प्रचार इन अभी चीज़ों(मोबाइल,इंटर्नेट...आदि) के द्वारा विश्व के कोने-कोने तक कर सके और सदग्रंथो से पूर्ण भक्ति मार्ग दे सके।
     ऐसा इस लिए हुआ क्योंकि पुराने समय में शिक्षा का अधिकार सिर्फ़ ब्राह्मण वर्ग के लोगों को हुआ करता था और वो जो छोटी जाति वालों को जो ग़लत-सलत बता देते थे तो वो वही मानते थे और उनको धोके में रखकर मन मानी करवाते थे और उन्हें भक्ति से रहित रखते थे और वो अपने ब्राह्मणवाद से उन लोगों को फ़ालतू के अड़्मबर में ही लटका के रखते थे और उन्हें मन मर्ज़ी करके लूटते थे। इसी लिए परमात्मा ने इस युग या सदी में शिक्षा का प्रचार अधिक करवाया और भी आवश्यक आविष्कार करवाए जो वर्तमान में अधिक प्रचलित है।
   जैसे:- इंटर्नेट,मोबाइल,फ़ोन,टेलिविज़न...... आदि।
और परमात्मा अपनी आत्माओं के मोक्ष के हर युग में पृथ्वी(काल लोक) में आते है।और भारत का आध्यात्मिक पुनरूत्थान करते है।
              ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।
     और वर्तमान में इसी नए पुनरूत्थान के लिए संत रामपाल जी रूप में भारत के हरियाणा राज्य के हिसार जिले में आए हुए है जो भारत का आध्यात्मिक दृष्टि से पुनरूत्थान कर रहे है।

वर्तमान समय (सन-2020महामारी के चलते ब्रह्मणो के आड़्मबर के परे हटाते हुए संत रामपाल जी विश्व को इस महामारी से बचाएँगे। 

Labels:

Tuesday, May 12, 2020

बीमारी: क्या है व क्यों होती है ? और इनका इलाज क्या है ?

बीमार:- बीमारी एक ऐसी गतिविधि है जिससे ग्रस्त होने पर व्यक्ति को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। और ये व्यक्ति को शारीरिक,मानसिक व आर्थिक तीनो रूपों से परेशान करती है।
      ये छोटी से बड़ी होने तक, भयानक रूप से सहज रूप (हल्की या भयानक नहीं) तक होती है।
      छोटी बीमारियों का इलाज आसानी से मिल जाता है। जैसे:- ज़ुकाम,ख़ासी,बुखार.......आदि-आदि।
     बड़ी बीमारियों का इलाज आसानी से नहीं मिलता है और ये छोटी बीमारियों से ही बड़ती है।जैसे:- कैन्सर,एड्ज़.... आदि-आदि।
   इनका इलाज सिर्फ़ सदभक्ति से ही किया जा सकता है अन्यथा बीमारी से ग्रसित रहकर ही मरना पड़ता है।

कारण:- बीमारी आधिकतर हमारे कर्मों के आधार पर होती है की हमारे कर्म कैसे है? जो हम वर्तमान में कर रहे होते है या पिछले जन्म में किए होते है।
    उदाहरण के लिए समझे:- की भीष्म पितामह को आख़िरी जीवन बाणो की शय्या पर बिताने पड़े थे इसका कारण उन्होंने अपने गुरु से पूछा तो उनको बताया कि किसी जन्म में उन्होंने एक साँप को अधमरा करके शूलों में फेंक दिया जिससे उसे बहुत पीड़ा हुई थी और वो ऐसे ही टका हुआ मर गया और उसका श्राप उनको लग गया और उन्होंने भी अपना आख़िरी जीवन वैसे ही व्यतीत करना पड़ा जैसा साँप ने किया था। जब भीष्म पितामह को अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा माँगी।
       चूँकि उनको “इक्षा मृत्यु” का वरदान था तो उन्हें इसका कष्ट अधिक शहन करना पड़ा।
भीष्म पितामह की आख़िरी स्थिति। 

इलाज:-बीमारी का इलाज या पाप कर्मों को काटने का इलाज सिर्फ़ पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हाई प्राप्त किया जा सकता है। और वो हर योग हमें आपनी आत्माओं के आते है जैसा कि निम्न बताया गया है:-
     
                                                                                                           “ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।”

          और वो हमें अपने पाप कर्म काटने के लिए पूर्ण सतभक्ति देते है और मोक्ष भी प्राप्त कराते है। वर्तमान समय में कबीर साहेब जी संत रामपाल जी महाराज रूप में आए हुए है। जो सतभक्ति देकर लोगों के पाप कर्मों को काट रहे है और समाज सेवा या समाज कल्याण कर रहे है साथ ही उनके अनुयायी भी अपनी पूरी भूमिका निभा रहे है।
      अतः हमें भी उनका ज्ञान समझना है और सतभक्ति लेकर अपने पाप कर्म काटने हाउ और मोक्ष की प्राप्ति करनी है।
👆एक पुस्तक अवश्य पढ़े।👇
Website:- www.jagatgururampalji.org

Labels:

Thursday, May 7, 2020

भगवान कौन है

प्रश्न:- भगवान कौन है ?
उत्तर:- भगवान वह है जिसकी भक्ति करने से हमारे दुःख और कुकर्म कटते है।भगवान हम सभी जीवात्माओ का परमपिता  परमेश्वर है।
   विषशेताए:-
 * भगवान पूर्ण परमात्मा को भी कहते है वास्तव में भगवान और पूर्ण परमात्मा एक हाई है।
* भगवान कभी माता के पेट से जन्म नहीं लेता है। वह सशरीर पृथ्वी लोक में आता है अपनी लीला करके सशरीर प्रस्थान करता है।
    * भगवान सबसे पहले अच्छी आत्माओं को मिलते है जैसे कलयुग में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज को मिले थे। उससे ग़रीबदास जो महाराज को मिले थे। तथा हाल ही में वो संत रामपाल जी रूप में हरियाणा के ज़िला हिसार की जेल में बैठे-बैठे लोगों को सदभक्ति बता रहे है। जिसको उनके अनुयायी पूर्ण रूप से विस्तार कर रहे है।
और उनको पूर्ण परमात्मा होने का हर तरह से प्रमाण दे रहे है।
 * अतः पूर्ण परमात्मा या भगवान हर युग में आते है।
जैसे:- ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।
और अधिक जानकारी के लिए👆Website दी गयी है उसे Visit करे। 

Labels:

Wednesday, May 6, 2020

नशे का मतलब नाश

शराब पीना कोई सही बात नहीं है फिर भी लोग अधिक मात्रा में इसका प्रयोग करते है जबकि शराब पीने वाले अधिक मात्रा जो लोग है वो Middle Class के लोग होते है जिनके पास शराब पीने की ना कोई वजह होती है और नहीं इतना पैसा होता है और फिर भी इतना पैसा ख़र्च करके लोग अपने घर-परिवार की स्थिति ना देखते हुए स्वयं अपने घर-परिवार को बर्बाद कर देते है।और आख़िरी में उनका नाश हो जाता है। अतः इस नाश से बचने  उन्हें पूर्ण संत (सदगुरु) की शरण ग्रहण करनी चाहिए और उनके द्वारा दी गयी सदभक्ति करनी चाहिए। 
आवश्यक पुस्तक मँगा कर पढ़ने के लिए 👆 दिए गये न. पर अपने नाम,पता और मोबाइल न. Send करे। 

Tuesday, May 5, 2020

कोरोना का इलाज

कोरोना के इलाज मात्र एक तरीक़े से हो सकता है वह है सदभक्ति करके।
सदभक्ति उस पूर्ण परमात्मा की होती है जिसने इस सम्पूर्ण सृष्टि की रचनाhttps://youtu.be/9aSzKI4TMAE की है।
“ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।”
अतः सदभक्ति का महत्त्व जाने और अपने मानव जीवन का उध्दार कराए।