Makes A Good Society
- Society क्या है ?
Society एक ऐसी जगह या सोच होती है जिसको हम हमेशा कही न कही अपने दिमाग मे जरूर रखते है और कही बाहर (Society से) कदम रखते समय यह सोचते है कि कही कोई ऐसा कम न हो जाये जिसके कारण हम society में निकलने लायक न रहे। हम इसी सोच के साथ society से बाहर रहकर अपनी जिंदगी जीते है।और इसके लिए जिम्मेदार भी हमारी society होती है।
इसका कारण है यदि हमारी society सही है तो हम society से बाहर जाकर भी सही और अच्छे काम ही करेंगे।
और अच्छी society का निर्माण तभी हो सकता है जब हम अच्छे वहां रहने वाले लोग अच्छे हो और ऐसा तभी संभव है जब लोगो मे कही न कही आध्यत्मिकता जागृत रहेगी।
जैसा कि आज-कल हम देखते है कि लोगो मे अध्यात्मिकता बिल्कुल खत्म-सी हो गयी है और अधिकतर फिल्मो और नाटकों में ज्यादा ध्यान लगते है जिनमे अश्लीलता अधिक दिखाई जाती है। हम मानते है कुछ फिल्में और नाटक ऐसे होते है जिनमे अश्लीलता नही दिखाई जाती परन्तु उनमे अपराध को और love afair को बढ़ावा दिया जाता है। और जब इन फिल्मों और नाटकों को बच्चों के साथ बैठकर देखते है वो उनमे अधिकतर negativity को ही अपने गहन में उतारते है और उनजे अपने schools और दोस्तो में experience करते है। और फिर ऐसे ही अपराध को बढ़ावा दिया जाता है। इसका अंजाम भी (उन बच्चों के माता-पिता जो उनके साथ बैठ फ़िल्म और नाटको को देखते है) बहुत भारी मात्रा में भुगतना पड़ता है। जैसा कि बच्चे नशीले पदार्थो love afair आदि के संपर्क में आ जाते है जिसका परिणाम आगे जाकर बहुत बुरा होता है।
इसी सब को दया में रखते हुए हमें आध्यत्मिकता और अपनी संस्कृति को बचाये रखना अति आवश्यक है। और हमे आध्यात्मिक गुरु जी की शरण भी ग्रहण करनी चाहिए है जो सद्गुरु हो सच्चा गुरु हो। हमारे सम्पूर्ण सभी धर्मों के ग्रंथों में भी बताया गया है पूर्ण गुरु एक समय में एक ही होता है जो सद्ज्ञान बताते है और सच्ची भक्ति बताते है साथ हमे सभी प्रकार के विकारों से बचते है।
इसका कारण है यदि हमारी society सही है तो हम society से बाहर जाकर भी सही और अच्छे काम ही करेंगे।
और अच्छी society का निर्माण तभी हो सकता है जब हम अच्छे वहां रहने वाले लोग अच्छे हो और ऐसा तभी संभव है जब लोगो मे कही न कही आध्यत्मिकता जागृत रहेगी।
जैसा कि आज-कल हम देखते है कि लोगो मे अध्यात्मिकता बिल्कुल खत्म-सी हो गयी है और अधिकतर फिल्मो और नाटकों में ज्यादा ध्यान लगते है जिनमे अश्लीलता अधिक दिखाई जाती है। हम मानते है कुछ फिल्में और नाटक ऐसे होते है जिनमे अश्लीलता नही दिखाई जाती परन्तु उनमे अपराध को और love afair को बढ़ावा दिया जाता है। और जब इन फिल्मों और नाटकों को बच्चों के साथ बैठकर देखते है वो उनमे अधिकतर negativity को ही अपने गहन में उतारते है और उनजे अपने schools और दोस्तो में experience करते है। और फिर ऐसे ही अपराध को बढ़ावा दिया जाता है। इसका अंजाम भी (उन बच्चों के माता-पिता जो उनके साथ बैठ फ़िल्म और नाटको को देखते है) बहुत भारी मात्रा में भुगतना पड़ता है। जैसा कि बच्चे नशीले पदार्थो love afair आदि के संपर्क में आ जाते है जिसका परिणाम आगे जाकर बहुत बुरा होता है।
इसी सब को दया में रखते हुए हमें आध्यत्मिकता और अपनी संस्कृति को बचाये रखना अति आवश्यक है। और हमे आध्यात्मिक गुरु जी की शरण भी ग्रहण करनी चाहिए है जो सद्गुरु हो सच्चा गुरु हो। हमारे सम्पूर्ण सभी धर्मों के ग्रंथों में भी बताया गया है पूर्ण गुरु एक समय में एक ही होता है जो सद्ज्ञान बताते है और सच्ची भक्ति बताते है साथ हमे सभी प्रकार के विकारों से बचते है।
Labels: Bhagwan, Guru | Spirituality | Saint, Society



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