बीमारी: क्या है व क्यों होती है ? और इनका इलाज क्या है ?
बीमार:- बीमारी एक ऐसी गतिविधि है जिससे ग्रस्त होने पर व्यक्ति को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। और ये व्यक्ति को शारीरिक,मानसिक व आर्थिक तीनो रूपों से परेशान करती है।
ये छोटी से बड़ी होने तक, भयानक रूप से सहज रूप (हल्की या भयानक नहीं) तक होती है।
छोटी बीमारियों का इलाज आसानी से मिल जाता है। जैसे:- ज़ुकाम,ख़ासी,बुखार.......आदि-आदि।
बड़ी बीमारियों का इलाज आसानी से नहीं मिलता है और ये छोटी बीमारियों से ही बड़ती है।जैसे:- कैन्सर,एड्ज़.... आदि-आदि।
इनका इलाज सिर्फ़ सदभक्ति से ही किया जा सकता है अन्यथा बीमारी से ग्रसित रहकर ही मरना पड़ता है।
कारण:- बीमारी आधिकतर हमारे कर्मों के आधार पर होती है की हमारे कर्म कैसे है? जो हम वर्तमान में कर रहे होते है या पिछले जन्म में किए होते है।
उदाहरण के लिए समझे:- की भीष्म पितामह को आख़िरी जीवन बाणो की शय्या पर बिताने पड़े थे इसका कारण उन्होंने अपने गुरु से पूछा तो उनको बताया कि किसी जन्म में उन्होंने एक साँप को अधमरा करके शूलों में फेंक दिया जिससे उसे बहुत पीड़ा हुई थी और वो ऐसे ही टका हुआ मर गया और उसका श्राप उनको लग गया और उन्होंने भी अपना आख़िरी जीवन वैसे ही व्यतीत करना पड़ा जैसा साँप ने किया था। जब भीष्म पितामह को अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा माँगी।
चूँकि उनको “इक्षा मृत्यु” का वरदान था तो उन्हें इसका कष्ट अधिक शहन करना पड़ा।
इलाज:-बीमारी का इलाज या पाप कर्मों को काटने का इलाज सिर्फ़ पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हाई प्राप्त किया जा सकता है। और वो हर योग हमें आपनी आत्माओं के आते है जैसा कि निम्न बताया गया है:-
“ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।”
और वो हमें अपने पाप कर्म काटने के लिए पूर्ण सतभक्ति देते है और मोक्ष भी प्राप्त कराते है। वर्तमान समय में कबीर साहेब जी संत रामपाल जी महाराज रूप में आए हुए है। जो सतभक्ति देकर लोगों के पाप कर्मों को काट रहे है और समाज सेवा या समाज कल्याण कर रहे है साथ ही उनके अनुयायी भी अपनी पूरी भूमिका निभा रहे है।
अतः हमें भी उनका ज्ञान समझना है और सतभक्ति लेकर अपने पाप कर्म काटने हाउ और मोक्ष की प्राप्ति करनी है।
ये छोटी से बड़ी होने तक, भयानक रूप से सहज रूप (हल्की या भयानक नहीं) तक होती है।
छोटी बीमारियों का इलाज आसानी से मिल जाता है। जैसे:- ज़ुकाम,ख़ासी,बुखार.......आदि-आदि।
बड़ी बीमारियों का इलाज आसानी से नहीं मिलता है और ये छोटी बीमारियों से ही बड़ती है।जैसे:- कैन्सर,एड्ज़.... आदि-आदि।
इनका इलाज सिर्फ़ सदभक्ति से ही किया जा सकता है अन्यथा बीमारी से ग्रसित रहकर ही मरना पड़ता है।
कारण:- बीमारी आधिकतर हमारे कर्मों के आधार पर होती है की हमारे कर्म कैसे है? जो हम वर्तमान में कर रहे होते है या पिछले जन्म में किए होते है।
उदाहरण के लिए समझे:- की भीष्म पितामह को आख़िरी जीवन बाणो की शय्या पर बिताने पड़े थे इसका कारण उन्होंने अपने गुरु से पूछा तो उनको बताया कि किसी जन्म में उन्होंने एक साँप को अधमरा करके शूलों में फेंक दिया जिससे उसे बहुत पीड़ा हुई थी और वो ऐसे ही टका हुआ मर गया और उसका श्राप उनको लग गया और उन्होंने भी अपना आख़िरी जीवन वैसे ही व्यतीत करना पड़ा जैसा साँप ने किया था। जब भीष्म पितामह को अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा माँगी।
चूँकि उनको “इक्षा मृत्यु” का वरदान था तो उन्हें इसका कष्ट अधिक शहन करना पड़ा।
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| भीष्म पितामह की आख़िरी स्थिति। |
इलाज:-बीमारी का इलाज या पाप कर्मों को काटने का इलाज सिर्फ़ पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हाई प्राप्त किया जा सकता है। और वो हर योग हमें आपनी आत्माओं के आते है जैसा कि निम्न बताया गया है:-
“ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।”
और वो हमें अपने पाप कर्म काटने के लिए पूर्ण सतभक्ति देते है और मोक्ष भी प्राप्त कराते है। वर्तमान समय में कबीर साहेब जी संत रामपाल जी महाराज रूप में आए हुए है। जो सतभक्ति देकर लोगों के पाप कर्मों को काट रहे है और समाज सेवा या समाज कल्याण कर रहे है साथ ही उनके अनुयायी भी अपनी पूरी भूमिका निभा रहे है।
अतः हमें भी उनका ज्ञान समझना है और सतभक्ति लेकर अपने पाप कर्म काटने हाउ और मोक्ष की प्राप्ति करनी है।
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Labels: Disease | बीमारी।




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