भगवान कौन है
प्रश्न:- भगवान कौन है ?
उत्तर:- भगवान वह है जिसकी भक्ति करने से हमारे दुःख और कुकर्म कटते है।भगवान हम सभी जीवात्माओ का परमपिता परमेश्वर है।
विषशेताए:-
* भगवान पूर्ण परमात्मा को भी कहते है वास्तव में भगवान और पूर्ण परमात्मा एक हाई है।
* भगवान कभी माता के पेट से जन्म नहीं लेता है। वह सशरीर पृथ्वी लोक में आता है अपनी लीला करके सशरीर प्रस्थान करता है।
* भगवान सबसे पहले अच्छी आत्माओं को मिलते है जैसे कलयुग में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज को मिले थे। उससे ग़रीबदास जो महाराज को मिले थे। तथा हाल ही में वो संत रामपाल जी रूप में हरियाणा के ज़िला हिसार की जेल में बैठे-बैठे लोगों को सदभक्ति बता रहे है। जिसको उनके अनुयायी पूर्ण रूप से विस्तार कर रहे है।
और उनको पूर्ण परमात्मा होने का हर तरह से प्रमाण दे रहे है।
* अतः पूर्ण परमात्मा या भगवान हर युग में आते है।
जैसे:- ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।
उत्तर:- भगवान वह है जिसकी भक्ति करने से हमारे दुःख और कुकर्म कटते है।भगवान हम सभी जीवात्माओ का परमपिता परमेश्वर है।
विषशेताए:-
* भगवान पूर्ण परमात्मा को भी कहते है वास्तव में भगवान और पूर्ण परमात्मा एक हाई है।
* भगवान कभी माता के पेट से जन्म नहीं लेता है। वह सशरीर पृथ्वी लोक में आता है अपनी लीला करके सशरीर प्रस्थान करता है।
* भगवान सबसे पहले अच्छी आत्माओं को मिलते है जैसे कलयुग में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज को मिले थे। उससे ग़रीबदास जो महाराज को मिले थे। तथा हाल ही में वो संत रामपाल जी रूप में हरियाणा के ज़िला हिसार की जेल में बैठे-बैठे लोगों को सदभक्ति बता रहे है। जिसको उनके अनुयायी पूर्ण रूप से विस्तार कर रहे है।
और उनको पूर्ण परमात्मा होने का हर तरह से प्रमाण दे रहे है।
* अतः पूर्ण परमात्मा या भगवान हर युग में आते है।
जैसे:- ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्रा 9 में लिखा है कि जब परमेश्वर शिशु रुप में पृथ्वी पर प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों द्वारा होती है। मैं सत्ययुग में ‘‘सत्यसुकृत’’ नाम से प्रकट हुआ था। त्रोतायुग में ‘‘मुनीन्द्र’’ नाम से तथा द्वापर में ‘‘करुणामय’’ नाम से और संवत् 1455 ज्येष्ठ शुद्धि पूर्णमासी को मैं कलयुग में ‘‘कबीर’’ नाम से प्रकट व प्रसिद्ध हुआ था।
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